गुरुवार, 11 नवंबर 2010

जलते रहें दीपक सदा काईम रहे ये रोशनी


 दीपावली 
जलते रहें दीपक सदा काईम रहे ये रोशनी
रजनी से गहरी निस्बतों में हो सुब्ह की ताजगी
 
भोपाल का न्याय 
अब खद्दरें खामोश हैं,अब मरघटों सा मौन है
गर कत्ल है इन्साफ का, तो लाश है भोपाल की 

नौकरशाही 
दफ्तर गया, चप्पल घिसे, अब तो कबीरा मान जा 
अफसर करे ना काम, ज्यूँ अजगर करे ना चाकरी 

अयोध्या निर्णय 
सेंकी सियासत ने सदा जिस आग पर है  रोटियां
सब मिल बुझा दें जो इसे, हो देश में दीपावली

आर्थिक संकट,खेल और भारत 
तूफ़ान में अविचल रहा, दिल्ली में यह अव्वल रहा 
अब मेरे हिन्दुस्तान की तू देख पाखी बानगी  

प्रकाश पाखी