मंगलवार, 23 मार्च 2010

यूँ तो किस किस को ना कहा दोषी



था रिभु जिस गुनाह का दोषी 
चुप थी अहल्या जिसे कहा दोषी 

न्याय जब जब न कर सके गौतम 
शैल तू बनकर उसे बना दोषी 

जब जले घर किसी के,चुप थे सब 
कह रहे अब कि थी हवा दोषी 

अपने हाथों चुनी थी बर्बादी 
अब कहे है तेरी दुआ दोषी 

हार के कसूरवार थे खुद ही 
यूँ तो किस किस को ना कहा दोषी 

प्रकाश पाखी