शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

आएगी कोई बात बातों से निकल,तू बात कर

गर है जिगर,तकदीर जाती है बदल,तू बात कर
उसको बता अपनी मुहब्बत आज चल, तू बात कर

इजहारे दिल कर,डर है रुसवा हो न जाए,गर तुझे
आएगी कोई बात बातों से निकल,तू बात कर 

क्या इश्क कर सकता नहीं,दुनिया ये संगदिल है तो क्या 
हों अश्क गर सच्चे,पत्थर जाते पिघल,तू बात कर 

नाकामियों पर बात नश्तर सी करे दुनिया वैसे 
जाती है तेरी कामयाबी से भी जल,तू बात कर 

गर शायरी की बात है,हर ग़म सुखन पाखी बने 
हो चोट दिल पर,दर्द से बनती ग़जल तू बात कर

आपका 
प्रकाश पाखी  

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई उम्दा.हर शेर पर दाद देने का मन करता है.याद रखने लायक,बातों बातों में ज़िक्र करने लायक.

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  2. आएगी कोई बात बातों से निकल,तू बात कर wahwa!!

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  3. आदरणीय सतपाल साहब,
    मैं बता नहीं सकता कि आपकी यह छोटी सी वाह ! मेरेलिए कितनी प्रेरणा दायक है...

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